शनिवार, 5 जनवरी 2013

इसमें भी कुछ भला है


    
                                इसमें भी कुछ भला है
                       -डा.राज सक्सेना
         बहुत समय पहले की बात है उत्तर भारत के सैकड़ों किलोमीटर लम्बे मैदान के
मध्य कोसी नदी के किनारे एक रोहिला रियासत थी जिसकी राजधानी रामपुर थी और यह
नवाबी, रियासत रामपुर के नाम से जानी जाती थी |
              रामपुर नगर से लगभग तेरह किलोमीटर दूर खेमपुर नाम का एक बड़ा गांव
था जिसमें बुद्धसेन नामक बुद्धिमान व्यक्ति रहता था | वह अच्छी खासी खेती का मालिक
था | एक सुगढ पत्नी, एक बेटा, एक बेटी और एक शानदार घोड़ा जिसे उसने बचपन से
बड़े प्यार से पाला था, उसके परिवारजन थे | बुद्धसेन बहुत बुद्धिमान,नेक और दूसरों की
मदद करने वाला एक सकारात्मक सोच का व्यक्ति था | कुछ भी हो जाय वह कभी बुरा -
सोचता तक नहीं था | उसकी सोच यह रहती थी कि जो हो रहा है अच्छे के लिए हो रहा
है | जो भी होगा वह अच्छा ही होगा |
                       बुद्धसेन अपने घोड़े को अपने बेटे के समान प्यार करता था | एक बार -
ऐसा हुआ कि उसका घोड़ा गायब हो गया | बुद्धसेन दुखी तो हुआ लेकिन निराश नहीं हुआ,
लोगों ने कहा," बड़ा बुरा हुआ तुम्हारा घोड़ा चोरी हो गया |"
                     बुद्धसेन ने कहा,"कुछ भी बुरा नहीं हुआ | उसके चोरी जाने में भी मेरी -
और उस (घोड़े)की कुछ भलाई है जो कुछ दिनों में सामने आ जाएगी |" लोग चुप हो -
गए | समय बीतता रहा | एक साल बीत गया |
                  और एक दिन लोगों ने देखा कि बुद्धसेन का घोड़ा अपने खूंटे के पास एक
नए शानदार घोड़े के साथ खड़ा था | लोगों ने बुद्धसेन की सोच और सहनशक्ति की प्रशंसा
की | किन्तु बुद्धसेन खुश नहीं हुआ | उसने आसमान की ओर निहार कर, एक ठंडी सांस
लेकर कहा, "जैसी तेरी मर्जी |"
                    लोगों को ताज्जुब हुआ मगर क्या कह सकते थे |
                     समय बीतता रहा | बुद्धसेन और उसका पुत्र नए घोडे को प्रशिक्षित कर -
साधने लगे | एक दिन जब बुद्धसेन का पुत्र नए घोड़े पर चढा उसे साध रहा था कि घोड़ा
बिदक गया |
                    पुत्र घोड़े से नीचे जा गिरा | उसकी एक टांग टूट चुकी थी |
                                     *  *  *  *  *
                     अब वह न तो खेती के काम का रहा और न ही घोड़ा साधने के |
                      बुद्धसेन भला आदमी था उसने सबकी सहायता ही की थी | इसलिए उसके
पुत्र के अपंग हो जाने से लोग बहुत दुखी हुए और दुःख प्रकट करने उसके पास आए मगर
बुद्धसेन न तो दुखी था और न ही उदास |
                        वह दुख प्रकट करने वालों से कहता, "मित्रवर मैं कर्म करने पर विश्वास -
करने वाला व्यक्ति हूं, मुझे पूर्ण विश्वास है कि मैं इस परिस्थिति में भी कुछ भला कर सकता
हूं |"
           लोग उसकी इस सकारात्मक सोच पर ताज्जुब करने लगे |
           बुद्धसेन का बेटा शारिरिक श्रम के योग्य तो रहा नहीं था किन्तु दिमाग का-
बहुत तेज था | बुद्धसेन ने उसे कौटिल्य का अर्थशास्त्र और गुप्तचर सेवा का अध्ययन करने
के लिए काशी भेज दिया |
           पांच वर्ष के बाद जब बेटा वापस लौटा तो वह आत्मविश्वास से भरपूर एक
अलग व्यक्तित्व का स्वामी बन चुका था |
           उसकी विद्वता की ख्याति जब नवाब रामपुर तक पहुंची तो उन्होंने उसे अपने
किले में बुलवाया और उसकी परीक्षा ली |
                  बुद्धसेन का पुत्र जिसका नाम सत्य सेन था | नवाब द्वारा ली गई हर एक
परीक्षा में खरा उतरा |
                   नवाब रामपुर ने अपने मंत्रीमण्डल से परामर्श किया | सबने एक मत से
राज्य को उसकी सेवाओं से लाभ उठाने का परामर्श दिया |
                    नवाब साहब ने सत्यसेन को अपने मंत्रीमण्डल में मंत्री नियुक्त कर उसे -
वित्त और गुप्तचर विभाग का प्रभारी बना कर सीधे मीर-बख्शी (प्रधान मंत्री) के अधीन कर
दिया |
                  सत्यसेन ने अपनी सम्पूर्ण क्षमता से कार्य प्रारम्भ कर दिया | पहले उसने
राज्य की बिग़ड़ी अर्थ-व्यवस्था को सुधारने के प्रयासों में राज्य के अनावश्यक खर्चों पर -
लगाम लगा कर उन्हें शून्य कर दिया | उससे हुई बचत को उसने राज्य की शांति-व्यवस्था
पर लगा कर शांति-व्यवस्था सही करदी | राज्य में जब सारे कर्मचारियों को वेतन समय -
पर मिलने लगा तो वे मन लगा कर काम करने लगे और शांति-व्यवस्था में अनवरत जुट
गए |
                  दूसरा काम सत्यसेन ने नवाब के राजनैतिक विरोधियों को पकड़ने का किया
ये लोग राज्य में विद्रोह की भावना फैला कर अव्यवस्था के सपने देख रहे थे | इनके राज्य
विरोधी सपनों को सत्यसेन ने अपने गुप्तचरों के माध्यम से नेस्तनाबूद कर दिया |
                  पूरे राज्य में सत्यसेन की वाह-वाही हो गई | पांच साल के थोड़े से समय
में नवाब ने सत्यसेन को मीर बख्शी (प्रधानमंत्री) के सर्वोच्च पद पर नियुक्त कर उसकी -
निष्ठापूर्वक की गई सेवाओं का प्रतिदान किया |
                  पुत्र के प्रधान मंत्री बन जाने के बाद भी बुद्धसेन ने न तो खेमपुर छोड़ा और
न ही कृषि कार्य |
                     जब लोग उसे बधाई देने गए तो उसने मुस्कुराकर कहा," अगर मैं मुसी-
बत के समय अपनी सकारात्मक सोच और साहस का परित्याग कर देता तो क्या मेरा बेटा
आज इतना बड़ा पद पा सकता था | बिल्कुल नहीं |" यह कह कर वह अपने कृषिकार्य -
में लग गया उसे न तो किसी बात का दुख हुआ और न ही बेटे के प्रधानमंत्री बनने का -
हर्ष | वह सब कुछ भूल कर अपने मुख्य कर्म में मस्त था | दुनिया की और बातों से -
उसने कोई सरोकार नहीं रखा था और यही था उसकी एक के बाद एक सफलता का राज |

सम्पर्क-धनवर्षा,हनुमान मन्दिर,खटीमा-262308 (उ.ख.)मोबा.- 9410718777, 08057320999,07579289888      


शनिवार, 3 नवंबर 2012

हिन्द की पहचान है


                   
 हिन्द की पहचान है
विश्व की पावन धरा पर, हिन्द की पहचान है |
पूर्ण भाषा ज्ञान में, हिन्दी गज़ब की शान  है |
है सम्मिश्रण बोलियों का, हिन्द में मौजूद जो,
हर पड़ोसी देश - भाषा  का  इसे, संज्ञान है |
है सरल इतनी कि सीखो,चार दिन में अद्यतन,
संसार के भाषाजगत में,सबसे यह आसान है |
विश्व की बोली कहीं की, ये  लिखे   स्पष्टतः,
क्या जगत की कोई भाषा?इस कदर गुणवान है|
जो लिखा,वह ही पढा जाता है इसमे जब पढो,
स्पष्ट है सब कुछ,नहीं इसमें कहीं अनुमान है |
बोलियों में सबसे मीठी,बात में कितनी सरल,
हर कहीं भी बात हो,अच्छा नहीं यदि ज्ञान है|
गोद में इसकी पली, पल   कर  जवां उर्दू हुई,
आज इसके संग उर्दू,  इस चमन की शान है |
सौ से ज्यादा देश में,समझीपढ़ी जाती है ये,
'राज'  अपने  देश के, कुछ  क्षेत्र में अंजान है |

बुधवार, 31 अक्टूबर 2012


                         
  खटीमा में
              उत्तराखण्ड में बाल साहित्य का इतिहास,दशा और दिशा
                  विषय पर उच्चस्तरीय सेमिनार
         स्थानीय प्रतिष्ठित शिक्षा भारती सीनियर सैकेण्डरी स्कूल के वृहद हाल में इक्कीस -
अक्टूबर,2012 को एक उच्चस्तरीय सेमिनार "उत्तराखण्ड में बाल साहित्य का इतिहास दशा और
दिशा"विषय पर (एक दिवसीय परिचर्चा) का आयोजन "उत्तराखण्ड बालकल्याण एंव बाल साहित्य
शोध संस्थान खटीमा के तत्वावधान में किया गया |
                 आयोजन को चार सत्रों में बांटा गया था | प्रथम सत्र औपचारिक उदघाटन सत्र था,
सत्र की अध्यक्षता राज.पी जी कालेज पौड़ी के प्राचार्य डा.सुभाषवर्मा ने की | सत्र के मुख्यअतिथि
स्थानीय विधायक नानक मत्ता, डा.प्रेम सिंह राना थे | विशिष्ट अतिथि के रूप में संस्था के
संरक्षक हरीश चन्द्र पाण्डेय चेयर पर्सन शिक्षा भारती संस्थान,प्रख्यात शिक्षाविद पूर्व उपनिदेशक
उच्चशिक्षा एल डी भट्ट,खटीमा व्यापारमण्डल के युवाअध्यक्ष अरूण सक्सेना तथा अल्मोड़ा अरबन
बैंक के शाखा प्रबन्धक दिग्विजय सिंह थे | समस्त सम्मानित अतिथियों ने इस प्रकार के प्रथम
सेमिनार को आयोजित करने के लिये संरक्षक मण्डल तथा संस्था के पदाधिकारियों की भूरि-भ्रूरि
प्रशंसा करते हुए पुनः-पुनः पुनरावृति की आवश्यकता पर बल दिया | सत्र का संचालन संस्था के
मुख्य कार्यकारी अधिकारी डा.राज सक्सेना ने किया |धन्यवादज्ञापन सचिव रमेशचौहान ने किया |
                      अगला सत्र चर्चा सत्र था जिसकी अध्यक्षता बाल वाटिका के स.सम्पादक डा.
भैंरू लाल गर्ग को करना थी किन्तु अपरिहार्य कारणों से आपका आगमन सम्भव न हो पाने
के कारण सत्र की अध्यक्षता स्थानीय राज.पी जी कालेज के प्राचार्य डा. हरिओमप्रकाश सिंह द्वारा
की गई | मुख्य अतिथि कुमांऊ विश्वविद्यालय के डीन तथा निदेशक,महादेवी वर्मा सृजन पीठ
रामगढ थे | विशिष्ट अतिथि के रूप में मंच पर संस्था की संरक्षक एंव नोजगे पबलिक स्कूल
सीनियर सैकेण्डरी स्कूल की चेयर पर्सन सुरिन्दर कौर दत्ता,उदय किरौला-सम्पादक बाल प्रहरी,
सुप्रसिद्ध कवियित्री नीलिमा श्रीवास्तव तथा युवाहस्ताक्षर का प्रतिनिधित्व कर रही अ.प्रोफेसर
अल्मोड़ा परिसर डा.मेघा भारती सुप्रसिद्ध गजलकार तथा मंच संचालक के आसीन होने के पश्-
चात विशेष रूप से बीज वक्तव्य के लिये हल्द्वानी राज.पी जी कालेज की हिन्दी विभागाध्यक्ष -
तथा सुप्रसिद्ध बाल साहित्यकार डा. प्रभापन्त को आमंत्रित किया गया  | उनके वक्तव्य से
पूर्व संस्था के इतिहास तथा उसकी गतिविधियों का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया संस्था के सी
ई ओ डा. राज सक्सेना ने | अपने बीज भाषण को अपनी सम्मोहक आवाज और सटीक -
प्रस्तुति के माध्यम से डा.प्रभा पन्त ने उत्तराखण्ड के बालसाहित्य के इतिहास पर विस्तृत -
प्रकाश डालते हुए वर्तमान दशा की बिन्दुवार व्याख्या की तथा बाल साहित्य के भविष्य को
उज्जवल बनाने के लिए उसे दिशा प्रदान करने के लिये बहुमूल्य सुझावों का प्रस्तुतिकरण भी
किया | बीच-बीच में जोरदार तालियों से चयनित विद्वान श्रोताओं ने मुख्य वक्ता के बीजभा-
षण की प्रशंसा की | अपने स्वागत भाषण में संस्था की संरक्षक सुरिन्दर कौर ने स्वागत के
साथ बाल साहित्य की आवश्यकताओं की भी विशद विवेचना की | उदय किरौला सम्पादक -
बाल प्रहरी ने अपने भाषण में वर्तमान बाल साहित्य की व्याधियों और उनके उन्मूलन पर -
विशेष बल देते हुए चर्चा विषय की विस्तृत विवेचना के साथ सामायिक प्रसंगों का भी चिन्ही-
करण किया | नीलिमा श्रीवास्तव ने भी बाल साहित्य की विस्तृत व्याख्या प्रस्तुत की |मुख्य
अतिथि डा.डी.एस.पोखरिया ने अपनी ख्याति और विद्वत्ता के समरूप विषय को सरल भाषा और
अकाट्य तर्कों के माध्यम से इस चर्चा में विशेष रूप से उन्हें सुनने आए बच्चों के अन्त-
मनों तक अपने भाव पंहुचाए | विद्वान प्राचार्य डा.सिंह ने अपने अध्यक्षीय भाषण को तर्कों -
और संतुलित विवेचना के माध्यम से समरूपता प्रदान की | सत्र का संचालन अत्यन्त ओज-
स्वी और सारगर्भित शैली में संस्था की संरक्षक डा. सुनीता चुफाल रतूड़ी ने किया |
               सत्रावसान के समय धन्यवाद प्रदर्शन संस्था के कोषाध्यक्ष के.सी.जोशी ने किया |
         तृतीय सत्र समापन एवं सम्मान समारोह सत्र था | सत्र की अध्यक्षता सुप्रसिद्ध
दोहा,हायकू और बाल साहित्यकार के रूप में स्थापित डा.राम निवास मानव ने की | मुख्य
अतिथि के रूप में मंच पर आसीन थे युवा हृदय सम्राट साहित्य के क्षेत्र में नव स्थापित हस्ता-
क्षर विधायक खटीमा पुष्कर सिंह धामी | मंचासीन विशिष्ट अतिथि थे संस्था के संरक्षक  -
सुदर्शन वर्मा, नवयुवक साहित्यकार उद्योगपति वरूण अग्रवाल, इस विशेष समारोह में श्रेष्ट -
नागरिक शिरोमणि सम्मान से सम्मानित किये जाने वाले कै.ठाकुर सिंह खाती और नेपाल से
पधारे नेपाली पत्रिका पल्लव के सम्पादक लक्ष्मी दत्त भट्ट | इस अवसर पर सुप्रसिद्ध शिक्षा-
विद डा.डी एस पोखरिया के साथ,डा.सुभाष वर्मा,डा.पी एस राना विधायक,संरक्षक हरीश -
चन्द्र पाण्डेय,डा.प्रभा पन्त,डा.राम निवास मानव,विधायक पुष्कर सिंह धामी,उदय किरौला,
नीलिमा श्रीवास्तव,डा.मेघा भारती तथा नेपाल से पधारे लक्ष्मी दत्त भट्ट को सम्मानित किया
गया | साथ ही तीन स्थानीय साहित्यकारों डा.सिद्धेश्वर सिंह,रावेन्द्र कुमार रवि और वरूण-
अग्रवाल को भी सम्मानित किया गया | कै.ठाकुर सिंह खाती को उनकी सामाजिक और सां-
स्कृति असाधारण सेवाओं के लिये श्रेष्ट नागरिक शिरोमणि सम्मान से विभूषित किया गया |
अपने औपचारिक भाषणों में समस्त मंचासीन अतिथियों ने बाल साहित्य की दशा और दिशा
का विवेचन किया | सत्र का संचालन डा.राज सक्सेना और डा.सुनीता चुफाल रतूड़ी ने किया  |
श्राफ पब्लिक स्कूल की प्रखरप्रवक्ता अंजू भट्ट ने समस्त अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापने किया |
                         अन्तिम चतुर्थ सत्र में उपस्थित कविगणों की कविसंगोष्ठी का आयोजन किया
गया | संगोष्ठी की अध्यक्षता रावेन्द्र कुमार रवि ने की तथा मुख्य अतिथि पुष्कर सिंह धामी
थे |विशिष्ट अतिथि आमन्त्रित कवि डा.रामनिवास मानव,डा.प्रभापन्त,वरूण  अग्रवाल,पु
ष्कर सिहं धामी,नीलिमा श्रीवास्तव, डा.राज सक्सेना और नेपाल से पधारे लक्ष्मीदत्त भट्ट ने
कविता पाठ किया रावेन्द्र रवि ने अन्त में सुन्दर कविताएं सुनाईं  | कविगोष्ठी का सफल
संचालन डा.-सुभाष वर्मा ने किया | अंत में राज सक्सेना ने समस्त आमंत्रितों का धन्यवाद
देते हुए उपस्थित विद्वदजनों को अपनी दो पंक्तियां समर्पित कीं -
          इस शहर के नाम से लोगों ने जाना है हमें,
          अब हमारे नाम से जानेंगे इसको लोग सब |
                                                 


                            खटीमा में
              उत्तराखण्ड में बाल साहित्य का इतिहास,दशा और दिशा
                  विषय पर उच्चस्तरीय सेमिनार
         स्थानीय प्रतिष्ठित शिक्षा भारती सीनियर सैकेण्डरी स्कूल के वृहद हाल में इक्कीस -
अक्टूबर,2012 को एक उच्चस्तरीय सेमिनार "उत्तराखण्ड में बाल साहित्य का इतिहास दशा और
दिशा"विषय पर (एक दिवसीय परिचर्चा) का आयोजन "उत्तराखण्ड बालकल्याण एंव बाल साहित्य
शोध संस्थान खटीमा के तत्वावधान में किया गया |
                 आयोजन को चार सत्रों में बांटा गया था | प्रथम सत्र औपचारिक उदघाटन सत्र था,
सत्र की अध्यक्षता राज.पी जी कालेज पौड़ी के प्राचार्य डा.सुभाषवर्मा ने की | सत्र के मुख्यअतिथि
स्थानीय विधायक नानक मत्ता, डा.प्रेम सिंह राना थे | विशिष्ट अतिथि के रूप में संस्था के
संरक्षक हरीश चन्द्र पाण्डेय चेयर पर्सन शिक्षा भारती संस्थान,प्रख्यात शिक्षाविद पूर्व उपनिदेशक
उच्चशिक्षा एल डी भट्ट,खटीमा व्यापारमण्डल के युवाअध्यक्ष अरूण सक्सेना तथा अल्मोड़ा अरबन
बैंक के शाखा प्रबन्धक दिग्विजय सिंह थे | समस्त सम्मानित अतिथियों ने इस प्रकार के प्रथम
सेमिनार को आयोजित करने के लिये संरक्षक मण्डल तथा संस्था के पदाधिकारियों की भूरि-भ्रूरि
प्रशंसा करते हुए पुनः-पुनः पुनरावृति की आवश्यकता पर बल दिया | सत्र का संचालन संस्था के
मुख्य कार्यकारी अधिकारी डा.राज सक्सेना ने किया |धन्यवादज्ञापन सचिव रमेशचौहान ने किया |
                      अगला सत्र चर्चा सत्र था जिसकी अध्यक्षता बाल वाटिका के स.सम्पादक डा.
भैंरू लाल गर्ग को करना थी किन्तु अपरिहार्य कारणों से आपका आगमन सम्भव न हो पाने
के कारण सत्र की अध्यक्षता स्थानीय राज.पी जी कालेज के प्राचार्य डा. हरिओमप्रकाश सिंह द्वारा
की गई | मुख्य अतिथि कुमांऊ विश्वविद्यालय के डीन तथा निदेशक,महादेवी वर्मा सृजन पीठ
रामगढ थे | विशिष्ट अतिथि के रूप में मंच पर संस्था की संरक्षक एंव नोजगे पबलिक स्कूल
सीनियर सैकेण्डरी स्कूल की चेयर पर्सन सुरिन्दर कौर दत्ता,उदय किरौला-सम्पादक बाल प्रहरी,
सुप्रसिद्ध कवियित्री नीलिमा श्रीवास्तव तथा युवाहस्ताक्षर का प्रतिनिधित्व कर रही अ.प्रोफेसर
अल्मोड़ा परिसर डा.मेघा भारती सुप्रसिद्ध गजलकार तथा मंच संचालक के आसीन होने के पश्-
चात विशेष रूप से बीज वक्तव्य के लिये हल्द्वानी राज.पी जी कालेज की हिन्दी विभागाध्यक्ष -
तथा सुप्रसिद्ध बाल साहित्यकार डा. प्रभापन्त को आमंत्रित किया गया  | उनके वक्तव्य से
पूर्व संस्था के इतिहास तथा उसकी गतिविधियों का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया संस्था के सी
ई ओ डा. राज सक्सेना ने | अपने बीज भाषण को अपनी सम्मोहक आवाज और सटीक -
प्रस्तुति के माध्यम से डा.प्रभा पन्त ने उत्तराखण्ड के बालसाहित्य के इतिहास पर विस्तृत -
प्रकाश डालते हुए वर्तमान दशा की बिन्दुवार व्याख्या की तथा बाल साहित्य के भविष्य को
उज्जवल बनाने के लिए उसे दिशा प्रदान करने के लिये बहुमूल्य सुझावों का प्रस्तुतिकरण भी
किया | बीच-बीच में जोरदार तालियों से चयनित विद्वान श्रोताओं ने मुख्य वक्ता के बीजभा-
षण की प्रशंसा की | अपने स्वागत भाषण में संस्था की संरक्षक सुरिन्दर कौर ने स्वागत के
साथ बाल साहित्य की आवश्यकताओं की भी विशद विवेचना की | उदय किरौला सम्पादक -
बाल प्रहरी ने अपने भाषण में वर्तमान बाल साहित्य की व्याधियों और उनके उन्मूलन पर -
विशेष बल देते हुए चर्चा विषय की विस्तृत विवेचना के साथ सामायिक प्रसंगों का भी चिन्ही-
करण किया | नीलिमा श्रीवास्तव ने भी बाल साहित्य की विस्तृत व्याख्या प्रस्तुत की |मुख्य
अतिथि डा.डी.एस.पोखरिया ने अपनी ख्याति और विद्वत्ता के समरूप विषय को सरल भाषा और
अकाट्य तर्कों के माध्यम से इस चर्चा में विशेष रूप से उन्हें सुनने आए बच्चों के अन्त-
मनों तक अपने भाव पंहुचाए | विद्वान प्राचार्य डा.सिंह ने अपने अध्यक्षीय भाषण को तर्कों -
और संतुलित विवेचना के माध्यम से समरूपता प्रदान की | सत्र का संचालन अत्यन्त ओज-
स्वी और सारगर्भित शैली में संस्था की संरक्षक डा. सुनीता चुफाल रतूड़ी ने किया |
               सत्रावसान के समय धन्यवाद प्रदर्शन संस्था के कोषाध्यक्ष के.सी.जोशी ने किया |
         तृतीय सत्र समापन एवं सम्मान समारोह सत्र था | सत्र की अध्यक्षता सुप्रसिद्ध
दोहा,हायकू और बाल साहित्यकार के रूप में स्थापित डा.राम निवास मानव ने की | मुख्य
अतिथि के रूप में मंच पर आसीन थे युवा हृदय सम्राट साहित्य के क्षेत्र में नव स्थापित हस्ता-
क्षर विधायक खटीमा पुष्कर सिंह धामी | मंचासीन विशिष्ट अतिथि थे संस्था के संरक्षक  -
सुदर्शन वर्मा, नवयुवक साहित्यकार उद्योगपति वरूण अग्रवाल, इस विशेष समारोह में श्रेष्ट -
नागरिक शिरोमणि सम्मान से सम्मानित किये जाने वाले कै.ठाकुर सिंह खाती और नेपाल से
पधारे नेपाली पत्रिका पल्लव के सम्पादक लक्ष्मी दत्त भट्ट | इस अवसर पर सुप्रसिद्ध शिक्षा-
विद डा.डी एस पोखरिया के साथ,डा.सुभाष वर्मा,डा.पी एस राना विधायक,संरक्षक हरीश -
चन्द्र पाण्डेय,डा.प्रभा पन्त,डा.राम निवास मानव,विधायक पुष्कर सिंह धामी,उदय किरौला,
नीलिमा श्रीवास्तव,डा.मेघा भारती तथा नेपाल से पधारे लक्ष्मी दत्त भट्ट को सम्मानित किया
गया | साथ ही तीन स्थानीय साहित्यकारों डा.सिद्धेश्वर सिंह,रावेन्द्र कुमार रवि और वरूण-
अग्रवाल को भी सम्मानित किया गया | कै.ठाकुर सिंह खाती को उनकी सामाजिक और सां-
स्कृति असाधारण सेवाओं के लिये श्रेष्ट नागरिक शिरोमणि सम्मान से विभूषित किया गया |
अपने औपचारिक भाषणों में समस्त मंचासीन अतिथियों ने बाल साहित्य की दशा और दिशा
का विवेचन किया | सत्र का संचालन डा.राज सक्सेना और डा.सुनीता चुफाल रतूड़ी ने किया  |
श्राफ पब्लिक स्कूल की प्रखरप्रवक्ता अंजू भट्ट ने समस्त अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापने किया |
                         अन्तिम चतुर्थ सत्र में उपस्थित कविगणों की कविसंगोष्ठी का आयोजन किया
गया | संगोष्ठी की अध्यक्षता रावेन्द्र कुमार रवि ने की तथा मुख्य अतिथि पुष्कर सिंह धामी
थे |विशिष्ट अतिथि आमन्त्रित कवि डा.रामनिवास मानव,डा.प्रभापन्त,वरूण  अग्रवाल,पु
ष्कर सिहं धामी,नीलिमा श्रीवास्तव, डा.राज सक्सेना और नेपाल से पधारे लक्ष्मीदत्त भट्ट ने
कविता पाठ किया रावेन्द्र रवि ने अन्त में सुन्दर कविताएं सुनाईं  | कविगोष्ठी का सफल
संचालन डा.-सुभाष वर्मा ने किया | अंत में राज सक्सेना ने समस्त आमंत्रितों का धन्यवाद
देते हुए उपस्थित विद्वदजनों को अपनी दो पंक्तियां समर्पित कीं -
          इस शहर के नाम से लोगों ने जाना है हमें,
          अब हमारे नाम से जानेंगे इसको लोग सब |
                                                   ममता सक्सेना,खटीमा-२६२३०८(उ.ख.)

बुधवार, 19 सितंबर 2012

सुख्,शांति,सरसता बहने दो


           सुख्,शांति,सरसता बहने दो
                             -राज सक्सेना
विषवाण न छोड़ो वाणी से, अमृत सी कविता कहने दो |
रखदो इन घातक तीरों को,सुख,शांति,सरसता बहने दो |
           मानवरक्तों से लथपथ जो,
           क्यों उठा लिए दोधारे हैं |
           इनपर जिनका भी रक्त लगा,
           वे भी तो सभी हमारे हैं |
छोड़ो सब मुद्दे लड़ने के, तज - कटुता,मृदुता रहने दो |
रखदो इन घातक तीरों को,सुख,शांति,सरसता बहने दो |
           इस प्रजा-तंत्र  के सागर से,
           दूषित - शैवाल हटाना  है  |
           जो बिके खनकते सिक्कों पर,
           उनको अब सबक सिखाना है |
मिट रही भूख,डर खत्म हुआ,जीवित समरसता रहने दो |
रखदो इन घातक तीरों को,सुख,शांति,सरसता बहने दो |
           सद्प्रेम तुम्हारा कहां गया,
           क्यों भाई-चारा सोता है |
           शिकवे सब दूर करो मन से,
           बातों से सब हल होता है |
बस एक धर्म है मानवता,  मन में मत जड़ता रहने दो |
रखदो इन घातक तीरों को,सुख,शांति,सरसता बहने दो |
           आगया समय अब उन्नति का,
           उठ कर अब चलने योग्य हुए |
           जो सपने देखे थे मिल कर,
           साकार, समर्पित-भोग्य  हुए |
मत आग लगाओ सपनों में, इन सबको पलता रहने दो |
रखदो इन घातक तीरों को,सुख,शांति,सरसता बहने दो |

  धन वर्षा,हनुमान मन्दिर, खटीमा-262308 (उ०ख०)
    मोबा०- 9410718777, 7579289888, 8057320999

बुधवार, 29 अगस्त 2012

काव्यान्जलि


       काव्यान्जलि
              - डा.राजसक्सेना
हे बाल काव्य के 'बाल'दूत,
साहित्य विधा के'शौरि'श्रेष्ट |
हे ब्रह्म'रेडिड्',सम्पाद - दक्ष,
आदित्य-रूप, हे सर्व-श्रेष्ट |

रक्षक बन 'चन्दा - मामा' के,
पच्चीस वर्ष जगमग करके |
बन गए बालसाहित्यशिखर,
अनुपमतम-सम्पादन करके |

पैरों पर अपने खड़ा किया,
भूलुण्ठित बाल विधाओं को |
साहित्य जगत में स्थापित,
कर दिया नवल सीमाओं को |

हे बाल सृष्टि-साहित्य जनक,
इतिहास आपने रच डाला |
दोयम दर्जा,  जो रहा सदा,
समकक्ष 'अन्य' के कर डाला |

नवजीवन दे  बालविधाओं को,
श्रीमय कर वैभव पूर्ण किया |
करदिया आपने उज्जवलतम,
गरिमामण्डित-सम्पूर्ण किया |

आभारी हैं हम, नर - पुंगव -,
गुणगान  आपका  गाते हैं |
ले श्रेष्ट-सोच,  सादा - जीवन,
नित श्रेष्ट आप बन जाते हैं |

'श्रद्धेय आपने , ' रेडडी '   जी  ,
स्वर्णिम - इतिहास बनाया है |
जो नहीं कर सका था कोई,
वह ही करके दिखलाया है |

कर - वद्ध निवेदन प्रभु से है,
सौ-सौ वर्षों तक जियें आप |
कुछ और रचें मानक नितनित,
शतशत कमलों से खिलें आप |

-धनवर्षा,हनुमान मन्दिर,
खटीमा-262308 (उ.ख.)
मोबा.- 9410718777

गुरुवार, 2 अगस्त 2012

हिस्सा बनो मत भीड़ का


 हिस्सा बनो मत भीड़ का
          - डा.राज सक्सेना
अवसर मिले नेतृत्व लो,
हिस्सा बनो मत भीड़ का |

हो नहीं तुम आमजन में,
हो यहां सबसे अलग |
तुम चलाओगे व्यवस्था,
आम लोगों से अलग |

छवि  मसीहा  की  बना-,
कारण बनो मत पीड़ का |
अवसर मिले नेतृत्व लो,
हिस्सा बनो मत भीड़ का |

क्या समस्या है यहां पर,
हल न कर पाओ जिसे ?
तोड़  पर्वत   राह   का  ,
समतल बना जाओ उसे |

लहलहाएं  बस्तियां -,
अंकुर उगे नित नीड़ का |
अवसर मिले नेतृत्व लो,
हिस्सा बनो मत भीड़ का |

है जरूरत'राज'जग को,
एक ऐसे मंत्र  की |
एक चुट्की में करे हल,
यातना हर तंत्र  की |

मत बनो उप अंग कोई,
रूप लो तुम रीढ का |
अवसर मिले नेतृत्व लो,
हिस्सा बनो मत भीड़ का |