सोमवार, 29 अगस्त 2011

janm divas


       जन्म-दिवस
              -डा.राज सक्सेना
जन्म दिवस की तुम्हें बधाई,
जिओ     सैकड़ों     साल |
जीवन हो पल-पल आनन्दित,
हो   उन्नत   नित   भाल |

टूट कर सुख-समृद्धि  बरसे,
वन उपवन सा जीवन महके |
कहीं शोक की  पड़े न छाया,
मन का पक्षी खुलकर चहके |

क्रमशः होते जाएं  कर   से,
नित्-नित  नये    कमाल |
जीवन हो पल-पल आनन्दित,
हो   उन्नत   नित   भाल |
दोस्त     फुलाएं     गाल |
जन्म दिवस की तुम्हें बधाई,
जिओ     सैकड़ों     साल |

दुनिया के ऐश्वर्य प्राप्त   कर,
शिक्षा  के प्रतिमान प्राप्तकर |
एक सफल व्यक्तित्व बनो तुम,
हैं जितने सम्मान  प्राप्त कर |

शक्ति तुम्हें दे ईश्वर   इतनी,
रक्खो   इन्हें      सम्हाल |
जन्म दिवस की तुम्हें बधाई,
जिओ     सैकड़ों     साल |

बैर   किसी से कभी बने ना,
संक्ट आये  किन्तू टिके  ना |
स्वस्थ और सम्पन्न रहॉ तुम्,
होठो से, मुस्कान  मिटे  ना |

क्रमशः होते   जाएं   कर से,
नित-नित नये      कमाल |
जन्म दिवस की तुम्हें बधाई,
जिओ     सैकड़ों     साल |    

रविवार, 28 अगस्त 2011

नेहरू बन जाऊं


       नेहरू बन जाऊं
               -डा.राज सक्सेना
नेहरू जैसा देश चला कर,
मैं भी नाम    कमाऊं |
मम्मी मुझे बताओ कैसे,
मै नेहरू   बन   जाऊं |

मिलकर रहें एकता से सब,
बंधें  सूत्र में   कस  कर |
अगर देश पर संकट  आए,
जूझें उससे    डट   कर |

दुनिया का आदर्श देश  हो,
ऐसा इसे        बनाऊं |
अचकन टोपी पहन जेब में,
लाल गुलाब      लगाऊं |

बाल दिवस पर अपने जैसे,
सब बच्चे      बुलवाऊं  |
जन्मदिवस चाचा नेहरू का,
सबके साथ     मनाऊं   |

हो समान पालन और शिक्षा,
 ऐसे नियम    बनाऊं  |
चाचा के सपनों का भारत,
मैं साकार      बनाऊं   |

शनिवार, 27 अगस्त 2011

एक सवाल


       एक सवाल
            - डा.राज सक्सेना
एक पुत्र ने,निश्छल मन से,
किया पिता से एक  सवाल |
हिन्दू-मुस्लिम होते क्या हैं,
कभी-कभी क्यों करें बबाल |

पापा बोले धर्म  अलग   है,
कुछ आचार नहीं मिलते  हैं |
सामाजिक कुछ नियम अलग है,
मूल विचार नहीं  मिलते  हैं |

मन्दिर में हिन्दू   की  पूजा,
मस्जिद में मुस्लिमी नमाज |
हिन्दू रखें अनेकों,एक माह के-,
रोजे रखता , तुर्क   समाज |

'पापा मन्दिर' बोला  बेटा,
का निर्माण ,करे  भगवान  |
या फिर रचना हर मस्जिद की,
आकर खुद करता  रहमान |

सब धर्मी  मजदूर   मिस्त्री,
मिल कर इनको यहां बनाते |
बन कर पूरा, होते ही क्यों,
दोनों अलग-अलग हो  जाते |

हिन्दू कहता ईश   एक  है,
मुस्लिम कहता  एक खुदा |
जैन,बौद्ध और सिख,ईसाई,
मिलकर भी क्यों रहें  जुदा |

बच्चे हम सब एक पिता के,
ना पूजा घर एक बनाते  |
हमसब के त्योहार अलग क्यों,
मिलकर हम क्यों नहीं मनाते |

ईश पिता जब एक  सभी का,
फिर तनाव की बात कहां  है |
सबका ईश्वर एक  जगत  में,
सबकी धरती एक  जहां   है |

रक्त एक सा, शक्ल  एक सी,
सब कहते  हम  हिन्दुस्तानी |
बच्चे मिलकर गले आज सब,
भूल जायं हर  बात  पुरानी |

भारत के बच्चों  को मिलकर,
काम अभी इतना  करना है |
एक नए  आदर्श देश   को,
हम सबने मिलकर रचना है |

गुरुवार, 18 अगस्त 2011

हिमालय


      हिमालय
          - डा.राज सक्सेना

भारत मां के राज मुकुट सा,सर पर जड़ा हिमालय |
जय जवान सा रक्षक बन कर,तत्पर खड़ा हिमालय |

अविरल देकर नीर नदी को,करता भरित हिमालय |
खेत उगलते सोना जिससे,करता हरित  हिमालय |

झेल रहा बर्फीली आंधी, इधर  न आने   देता-,
कष्ट सभी अपने ऊपर ही, बिना कहे  ले  लेता |

सागर से उठते बादल को,  पार न  होने  देता |
भारत में बरसा कर बादल. जलधि न खोने देता |

देता रहता  खनिज हमेशा, भारत धनिक बनाने,
सघन वनों को परिपूरित कर,जीवन सुखद बनाने |

किन्तु नहीं हम जीने देते, इसको  जीवन   इसका |
धीरे-धीरे अंग भंग  कर.  कुतर-कुतर तन इसका |

कसम एक सब मिलकर खाएं,हरा-भ्ररा हम इसे बनाएं,
लेता नहीं कभी बस देता, स्वर्णिम इसका  रूप बनाएं |
  धनवर्षा,हनुमानमन्दिर्,ख्टीमा-२६२३०८(उ०ख०)
          मो- ०९४१०७१८७७७

बुधवार, 17 अगस्त 2011

नहीं समझते कम


      नहीं समझते कम
                -डा.राज सक्सेना

हम सूरज और तारे हम,खुद को नहीं समझते कम |
संशय अगर किसी के मन में,आकर हमें दिखाले दम |

हम भारत का मान रखेंगे,ऊंची इसकी शान रखेंगे |
झण्डा है पहचान हमारी,झण्डे का सम्मान  रखेंगे |
तूफानों को रोकेंगे हम,खुद को नहीं समझते  कम |
संशय अगर किसी के मन में,आकर हमें दिखाले दम |

जात-पांत से दूर रहेंगे,प्रेम-भाव भरपूर   रखेंगे |
कितने बड़े पदों पर पहुंचें,ना सत्ता मद्-चूर रहेंगे |
ना धोखा दें, ना खाएं हम,खुद को नहीं समझते कम |
संशय अगर किसी के मन में,आकर हमें दिखाले दम |

विश्व गुरू भारत बन जाए,जन-गण-मन को गले लगाए |
कठिन परिश्रम करके ही तो,प्रजातन्त्र जन-जन तक जाए |
सम अधिकार दिला दें हम,नहीं समझते खुद को कम |
संशय अगर किसी के मन में,आकर हमें दिखाले दम |

  धनवर्षा,हनुमानमन्दिर,खटीमा-२६२३०८(उ०ख०)
        मो- ०९४१०७१८७७७

आदर्श दिन-चर्या


       आदर्श दिन-चर्या
                -डा.राज सक्सेना

सुबह सवेरे उठना बेटा,हल्की कसरत   करना बेटा |
छूना पैर बड़े जितने हों,तभी काम कुछ करना बेटा |

सही तरीके से ब्रश करना,दांत साफ पानी से करना |
मुखधोलो तब जाओनहाने,आकर उचित नाश्ता करना |

कलका पढ़ा पुनः दोहराओ,आज है पढ़ना नज़रफिराओ |
फिर शाला की करो तैयारी,बैग ढ़ंग से पुनः  लगाओ |

पूरी ड्रेस पहन कर आओ,बैग टांग कन्धे पर ले जाओ |
पंक्तिलगा बस में तुम चढ़ना,पंक्ति बना शाला में जाओ |

कक्षा में तुम ध्यान लगाकर,मन पढने में पूर्ण जमाकर |
नोट करो जो नोट करायें,अलग अलग गृहकार्य लगाकर |

हो छुट्टी मत दौड़ लगाओ,लगा पंक्ति बस मे चढ़ जाओ |
घर  आए  आराम से उतरो,दोनो ओर देख घर   जाओ |

लेलो नाश्ता मां से  खाओ,धमा-चौकड़ी  नहीं मचाओ  |
सुनो बात भी जो वह कहती,होकर फ्रैश खेलने  जाओ |

खेल खत्मकर वापस आओ,गृह का पूर्ण कार्य निबटाओ |
खाना खा बिस्तर पर जाओ, करो बन्द आंखें सो जाओ |

  धनवर्षा,हनुमानमन्दिर,खटीमा-२६२३०८(उ०ख०)
  मो- ०९४१०७१८७७७

सोमवार, 15 अगस्त 2011

ट्रैफिक रूल्स बताएं


    ट्रैफिक रूल्स बताएं
                -डा.राज सक्सेना
आओ बच्चों खेल खिलाएं |
चलना सड़कों पर सिखलाएं |
चलें सड़क पर अगर नियम से,
तभी सुरक्षित जीवन पाएं |

चलें सड़क पर अपने बांए |
बिना जरूरत पार न जाऍ |
बांए-दांए रहें   देखते -,
सजग रहें और चलते जाएं |

करना पार , जेब्रा पर जाएं |
देखें अपने , दाएं- बांए |
रुकता ट्रैफिक होता सिगनल,
सड़क क्रास तब हम कर पाएं |
मन मर्जी न कभी चलाएं ,
तभी सुरक्षित जीवन पाएं |

एक पंक्ति हर जगह लिखी है |
दुर्घटना  से  देर   भली है |
हबड़-तबड़ करती दुर्घटना ,
जगह-जगह पर मौत खड़ी है |
सिगनल पालन साध्य बनाएं |
तभी सुरक्षित जीवन पाएं |

स्वर्ग-लोक का टिकट कटाना |
ड्राइव करते,  फोन  उठाना |
मिले अगर अर्जेन्ट काल तो,
रुको वहीं तब फोन  उठाना |
करके अपनी गाड़ी    बांए |
तभी सुरक्षित जीवन पाएं |

 धनवर्षा,हनुमानमन्दिर,
खटीमा -२६२३०८ (उ०ख०)
 मो- ०९४१०७१८७७७